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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 15 May 2026, 11:56 am
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरकार बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में 3-3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया है। नई दरें 15 मई से लागू हो गई हैं। राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। इसके साथ ही सीएनजी भी 2 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो गई है। दिल्ली में अब सीएनजी 79.09 रुपए प्रति किलो मिलेगी। करीब दो साल बाद हुई इस बढ़ोतरी से आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। खासतौर पर परिवहन, खेती और घरेलू खर्चों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण यह फैसला लेना पड़ा।
महंगाई बढ़ने की आशंका, आम आदमी पर असर
डीजल की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर माल ढुलाई और खेती पर पड़ता है। ट्रकों और टेंपो का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो सकते हैं। किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी। इसका असर आने वाले समय में अनाज और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। वहीं बस, ऑटो और स्कूल वाहनों का किराया बढ़ने की भी संभावना है। कई ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने संकेत दिए हैं कि ईंधन महंगा होने के बाद किराए की समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और रोजमर्रा की कमाई करने वाले लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
तेल कंपनियों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है। सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि उन्हें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां लंबे समय से दबाव में थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि 3 रुपए की बढ़ोतरी अभी पर्याप्त नहीं है और अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल और महंगे हो सकते हैं।
चुनाव से पहले मिली राहत, अब फिर बढ़ा बोझ
मार्च 2024 से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर थीं। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। इसके अलावा स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में भी 10-10 रुपए तक की कमी की गई थी ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं पर न पड़े। सरकार लगातार यह कहती रही कि पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, लेकिन भारत में दाम नियंत्रित रखे गए। अब तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे और वैश्विक हालात को देखते हुए कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल ही में ईंधन के सीमित उपयोग की अपील कर चुके हैं और लोगों से पेट्रोलियम उत्पादों का जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने को कहा था।
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