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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 06 Mar 2026, 04:57 pm
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व इस बार सिर्फ छोटे बदलाव नहीं बल्कि संगठनात्मक ढांचे में व्यापक फेरबदल करने की योजना बना रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश संगठन के साथ-साथ सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को भी बदला जा सकता है। माना जा रहा है कि यह कदम संगठन को चुनाव से पहले ज्यादा सक्रिय और मजबूत बनाने की रणनीति का हिस्सा है। इस पूरे बदलाव को मिशन 2027 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश
दरअसल उत्तर प्रदेश में भाजपा का संगठन काफी बड़ा है। प्रदेश में पार्टी का ढांचा करीब 1918 मंडलों, 98 संगठनात्मक जिलों और छह बड़े क्षेत्रों में बंटा हुआ है। पिछले कुछ महीनों से जिलाध्यक्षों और मंडल अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया भी लगातार चल रही है। अब तक पार्टी 94 नए जिलाध्यक्षों की घोषणा कर चुकी है, जबकि कुछ जिलों में अभी नियुक्तियां बाकी हैं। वाराणसी, चंदौली, देवरिया और अंबेडकर नगर जैसे जिलों में जल्द नए जिलाध्यक्ष घोषित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी पर्यवेक्षकों ने जिलों में रायशुमारी भी पूरी कर ली है और रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंप दी गई है।
क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा अब क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर है। पार्टी सूत्रों के अनुसार लगभग सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदला जा सकता है। बताया जा रहा है कि कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ पार्टी नेतृत्व के पास शिकायतें भी पहुंची हैं, जिनमें संगठनात्मक कामकाज और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा जैसे आरोप शामिल बताए जाते हैं।
इसी वजह से नेतृत्व अब चुनाव से पहले संगठन में नई ऊर्जा और सक्रियता लाना चाहता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है।
इस पद की अहमियत क्यों बढ़ी
पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय अध्यक्ष का पद और अहम हो गया है। कई बार क्षेत्रीय अध्यक्षों को बाद में विधान परिषद भेजे जाने की परंपरा भी देखी गई है। इसके अलावा विधानसभा टिकट के दावेदारों के नाम भी अक्सर जिलों से होते हुए क्षेत्रीय नेतृत्व के जरिए प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचते हैं। यही वजह है कि इस पद को लेकर पार्टी के अंदर काफी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। कई नेता इस जिम्मेदारी की दौड़ में बताए जा रहे हैं और लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
सामाजिक समीकरण भी बड़ी वजह
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस संभावित फेरबदल के पीछे एक बड़ा कारण सामाजिक समीकरण को संतुलित करना भी हो सकता है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि संगठन में हर क्षेत्र और हर सामाजिक वर्ग को प्रतिनिधित्व मिले। खासकर उन वर्गों को फिर से जोड़ने की कोशिश की जा रही है जो पिछले कुछ चुनावों में पार्टी से थोड़े दूर होते दिखाई दिए थे। इसलिए इस बार संगठनात्मक नियुक्तियों में सामाजिक गणित पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
मिशन 2027 की तैयारी
उत्तर प्रदेश में चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन भाजपा ने मिशन 2027 को लेकर अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। संगठन से लेकर सामाजिक रणनीति तक हर स्तर पर तैयारी की जा रही है ताकि चुनाव से पहले पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर सके। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रदेश भाजपा संगठन में यह संभावित बड़ा बदलाव कब होता है और किन नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है। क्योंकि यही बदलाव तय करेगा कि आगामी चुनाव में पार्टी किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।-आशीष शुक्ला, सह-संपादक की रिपोर्ट। -आशीष शुक्ला, सह संपादक की रिपोर्ट।
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