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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 06 Mar 2026, 04:03 pm
इस कार्यक्रम को सिर्फ एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, 15 मार्च को BSP संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती के मौके पर पार्टी ने “लखनऊ चलो” का आह्वान किया है। राजधानी के कांशीराम स्मारक स्थल पर होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से कार्यकर्ताओं को बुलाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 12 मंडलों से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचेंगे। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं के लिए नोएडा में भी एक अलग कार्यक्रम प्रस्तावित है, जहां छह मंडलों के लोग जुटेंगे।
सिर्फ जयंती नहीं, सियासी संदेश का मंच
पार्टी के भीतर यह संदेश दिया जा रहा है कि इस बार का कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहेगा। माना जा रहा है कि BSP सुप्रीमो मायावती इस मंच से आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर बड़ा संदेश दे सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, अपने संबोधन में वह आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को सक्रिय करने और नए सामाजिक समीकरण बनाने पर जोर दे सकती हैं। पार्टी के अंदर चर्चा है कि इस बार बसपा अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक के साथ-साथ ब्राह्मण और अन्य सवर्ण समुदायों को भी जोड़ने की कोशिश कर सकती है।
नए सामाजिक समीकरण की तलाश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में अगर सवर्ण समाज का एक हिस्सा सरकार की नीतियों से असंतुष्ट दिखाई देता है, तो बसपा उस नाराजगी को अपने पक्ष में करने की रणनीति बना सकती है। इसी वजह से 15 मार्च का कार्यक्रम पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले भी बसपा ने दलित-ब्राह्मण सामाजिक गठजोड़ के सहारे सफलता हासिल की थी। 2007 के विधानसभा चुनाव में इसी समीकरण ने मायावती को सत्ता तक पहुंचाया था। अब एक बार फिर उसी तरह का सामाजिक संतुलन बनाने की चर्चा हो रही है।
उम्मीदवारों की घोषणा भी शुरू
बसपा ने चुनावी तैयारियों के संकेत देते हुए कुछ सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नाम भी तय कर लिए हैं। जानकारी के अनुसार जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय, आजमगढ़ की दीदारगंज सीट से अबुल कैश, जौनपुर की मुंगरा बादशाहपुर सीट से विनोद मिश्रा और सहारनपुर देहात सीट से फिरोज आफताब के नामों पर सहमति बन चुकी है। पार्टी जल्द ही इन नामों की औपचारिक घोषणा कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दो महीनों में बसपा 50 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है, ताकि चुनावी तैयारियां समय से पहले शुरू हो सकें।
आकाश आनंद भी सक्रिय
इसी बीच पार्टी के युवा चेहरे आकाश आनंद भी सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। 15 मार्च को ही राजस्थान के भरतपुर में उनकी एक बड़ी रैली प्रस्तावित है, जहां वह कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। पार्टी नेतृत्व इसे संगठन विस्तार की रणनीति का हिस्सा मान रहा है।बसपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।
2027 की राजनीति पर असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बसपा अपने पारंपरिक दलित आधार को मजबूत रखते हुए ब्राह्मण और कुछ अन्य जातियों को साथ जोड़ने में सफल होती है, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। अब सभी की नजर 15 मार्च पर टिकी है, जब लखनऊ में होने वाला यह कार्यक्रम बसपा की आगे की रणनीति को लेकर कई संकेत दे सकता है। - आशीष शुक्ला, सह-संपादक की रिपोर्ट।
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