बांदा जेल से गैंगस्टर रवि काना की रिहाई पर बड़ी कार्रवाई, जेल अधीक्षक विक्रम सिंह निलंबित

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 31 Jan 2026, 12:17 pm
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बांदा जेल से गैंगस्टर रवि काना की बिना कोर्ट अनुमति रिहाई पर बड़ी कार्रवाई हुई है। जेल अधीक्षक विक्रम सिंह को निलंबित कर दिया गया। कारागार विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही और न्यायिक आदेशों की अवहेलना माना है।

बांदा जिला जेल से गैंगस्टर रवि काना की कथित गलत तरीके से रिहाई के मामले में उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जेल अधीक्षक विक्रम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने इसे जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही और न्यायिक आदेशों की अवहेलना माना है। निलंबन के आदेश जारी होते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और पूरे प्रकरण को लेकर उच्च स्तर पर मंथन जारी है।


बिना कोर्ट की अनुमति रिहाई, लापरवाही मानी गई गंभीर
कारागार विभाग की जांच में सामने आया है कि गैंगस्टर रवि काना को बिना न्यायालय की स्पष्ट अनुमति के जेल से रिहा कर दिया गया। यह मामला सामने आने के बाद इसे सीधे तौर पर न्यायिक आदेशों की अवहेलना माना गया। विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में कोर्ट की अनुमति अनिवार्य होती है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर जेल अधीक्षक विक्रम सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। आदेश में साफ कहा गया है कि यह लापरवाही विभागीय नियमों के खिलाफ है और इससे कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।


मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे, विभागीय जांच के आदेश
निलंबन अवधि के दौरान विक्रम सिंह को मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। इसके साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि रवि काना की रिहाई में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही और प्रक्रिया में कहां-कहां चूक हुई। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दायरे में अन्य जेलकर्मियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।


कोर्ट पहले ही मांग चुका है जवाब
बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर संबंधित कोर्ट पहले ही जेल प्रशासन से स्पष्टीकरण मांग चुका है। कोर्ट के रुख को देखते हुए कारागार विभाग ने भी सख्त कदम उठाया है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो यह मामला और गंभीर हो सकता था। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम से जेल प्रशासन में अफरा-तफरी का माहौल है और सभी की नजरें विभागीय जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

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